sacchi shayaris
क्या खूब लिखा है :
"कमा के इतनी दौलत भी मैं
अपनी "माँ" को दे ना पाया,
के जितने सिक्कों से "माँ"
मेरी नज़र उतारा करती थी..."
"कमा के इतनी दौलत भी मैं
अपनी "माँ" को दे ना पाया,
के जितने सिक्कों से "माँ"
मेरी नज़र उतारा करती थी..."
sacchi shayaris
Reviewed by Mr X
on
January 20, 2017
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