तू देख या न देख, तेरे देखने का ग़म नहीं ! तेरा न देखना भी तेरे देखने से कम नहीं !! सामिल नहीं हैं जिसमे तेरी यादे ...... वो जिन्दगी भी किसी जहनुम से कम नहीं !!
पलकों को कभी हमने भिगोए ही नहीं ! वो सोचती हैं की हम कभी रोये ही नहीं !! वो पूछती हैं की ख्वाबो में किसे देखते हो ? और हम हैं की उनकी यादो में सोए ही नहीं !!
मांग कर तुझे रव से पाया नहीं हमने ! कौन सा वो ख्वाब हैं जो पलकों में सजाया नहीं हमने ! तुम तो भुलोगी मुझे मालूम हैं ये जाने - जाना ! मगर एक लम्हा भी कभी तुझको भुलाया नहीं हम ने !!
एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों हैं ! इनकार करने पर भी चाहत का इकरार क्यों हैं !! उसे पाना नहीं हैं मेरी तक़दीर में सायद ! फिर भी हर मोड़ पर उसका इंतजार क्यों हैं !!
नाकाम सी कोशिस किया करते हैं ! हम हैं की उनसे प्यार किया करते हैं !! खुदा ने तक़दीर में टुटा तारा भी नहीं लिखा ! और हम हैं की चाँद की आरजू किया करते हैं !!
ख़ुशी तलास ली मैंने गम के आशियाने में ! अब कोई और क्या देगा मुझे इस ज़माने में !! कोई किसी के लिए इतना बेरहम न बने ! जितना दुनियां बन गई मुझको सताने में !!
हर बार मुझे जख्म ए दिल ना दिया कर ! तू मेरी नहीं तो मुझे दिखाई ना दिया कर !! सच-झूठ तेरी आँखों से हो जाता हैं जाहिर ! क़समें ना खा, इतनी सफाई ना दिया कर !!